भारतीय भाषाओं से गढ़वाल़ी भाषा का सह-संबंध विषय पर चर्चा
गढ़वाळ विश्वविद्यालय मा आयोजित ह्वे हिंदी पखवाड़ा समापन समारोह

मंगलवार, 30 सितंबर 2025 । श्रीनगर गढ़वाल।
आज हे०नं०ब०ग०केन्द्रीय विश्वविद्यालय श्रीनगर गढ़वाळा का चौरास परिसर स्थित ‘स्टूडेंट्स एक्टिविटी सेंटर’ मा हिंदी दिवस का उपलक्ष मा बीत्यां १४ सितंबर बे उर्ययां हिंदी पखवाड़ा कु समापन समारोह आयोजित ह्वे ।ये अवसर पर विश्वविद्यालय मा आयोजित हिंदी पखवाड़ा का तैत अलग अलग प्रतियोगिताओं का विजेता प्रतिभाग्यों तैं पुरस्कार दिए गैनि दगड़ै ‘भारतीय भाषाओं से गढवाळि भाषौ सह – संबंध’ विषै पर व्याख्यान भि ह्वे जैमा मुख्य वक्ता का रूप मा उत्तराखंड भाषा संस्थाना पूर्व सदस्य प्रसिद्ध भाषाविद अर साहित्यकार डॉ सुशील कोटनाला जी उपस्थित छा । कार्यक्रमौ शुभारंभ द्यू बाळी तैं ह्वे । विश्वविद्यालयै राजभाषा प्रकोष्ठै समन्वयक अर हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो० गुड्डी बिष्ट पँवारन कार्यक्रमौ शुभारंभ का दगड़ै विश्वविद्यालया माननीय कुलपति प्रो० श्रीप्रकाश सिंह कु हार्दिक आभार व्यक्त करि जौंका कुशल मार्गदर्शन मा हिंदी राजभाषा पखवाड़ा कार्यक्रम संचालित छौ ह्वऽणूं । दगड़ै प्रो० मोहन सिंह पंवार संकायाध्यक्ष भर्ती एवं प्रोन्नति कु भी आभार व्यक्त करि जौंकु अमूल्य सैयोग टैम टैम पर मिलणूं रै । पखवाड़ा दौरान विशेष सैयोगा वास्ता प्रोफेसर गुड्डी बिष्ट पंवार द्वारा प्रोफेसर सीमा धवन, डॉ राकेश नेगी, डॉ अमरजीत परिहार अर डॉ बालकृष्ण बधानी कु हार्दिक आभार व्यक्त कर्ये ग्ये ।
न्यूयां अतिथ्यूं स्वागत करदि तौंन ब्वलि कि यदि भाषा गुलाम ह्वलि त देश भी गुलाम ह्वलु। अत: अपणि भाषा तैं बचाणौ टैम ऐगि । दगड़ै प्रो०बिष्टन हिंदी मा काम कन्न वाळा कर्मचार्यूं का प्रोत्सान पर भी जवऽर दीनि । विश्वविद्यालय का अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो० ओ० पी० गुसाईंन अपणा उद्बोधन मा विश्वविद्यालय मा चलाए ग्यै हिंदी मा दसकत अभियानै सराहना करी तैं मातृभाषा गढ़वाळि नि बुन पर चिंता व्यक्त करि । परिसर निदेशक चौरास प्रो० आर० एस० नेगिन गढ़वाळि मा बुन पर ज्वोऽर दी तैं ब्वलि कि गढ़वाली भाषा थैं हम तैं घरै बै शुरू कन्न चैंद । मुख्य वक्ता का रूप मा उपस्थित पूर्व सदस्य (उत्तराखंड भाषा संस्थान) डॉ सुशील कोटनालान ‘भारतीय भाषाओं से गढ़वाली भाषा कु सह-संबंध’ विषय पर व्याख्यान देंद ब्वलि कि हिंदी अपणा प्रारंभिक काल (वीरगाथाकाल) मा जब प्राकृत अर अपभ्रंशा नजीक छै तब गढ़वाल मा गढ़वाळि राजभाषा छै । तौंन भाषाओं की विविधता तैं समृद्धि कु सूचक बतैक भारतीय भाषाओं का शब्दों की गढ़वाळि मा उपलब्धता पर प्रकाश डाळि । विवि का कुलसचिव प्रो० राकेश ड्योढ़ीन अपणा उद्बोधन मा ब्वलि कि मातृ भाषा मा अपणापन च । हमु मु जु बचि ग्ये स्य हमारि धरोहर च । वैतैं बचाणो प्रयास कन्न चैंद ।
अतिथ्यूं का उद्बोधना बाद हिंदी पखवाड़ा मा आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं का विजेता कर्मचार्यूं तैं पुरस्कार अर प्रमाण पत्र वितरण कर्ये ग्ये । कार्यक्रमा अंत मा राजभाषा प्रकोष्ठै समन्वयक अर हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो गुड्डी बिष्ट पँवारन धन्यवाद ज्ञापना दगड़ा कार्यक्रमै समापनै घोषणा करि । ये अवसर पर कार्यक्रम मा डॉ संजय पाण्डेय (उप निदेशक लोक कला अर संस्कृति निष्पादन केन्द्र),श्री सूरज प्रसाद (अनुवादक राजभाषा) , श्री पवन राणा (डाटा ऑपरेटर हिंदी विभाग), डॉ बालकृष्ण बधानी , डॉ अमरजीत परिहार, डॉ नवीन चन्द्र भट्ट, डॉ आकाशदीप, शोधार्थी राकेश सिंह, तुषार माहन, कोमल , प्रमोद उनियाल, शुभम् थपलियाल, शिवानी, पंकज सिंह, विकास यादव, शालिनी , मुरारी अर हिंदी विभागा हौर शोधार्थी और छात्र छात्राएं उपस्थित रैन। कार्यक्रमौ सफल संचालन डॉ सविता मैठाणीन करि ।
राकेश जिर्वाण ‘हंस’
शोधार्थी हिंदी
हे०न०ब०ग०केंद्रीय विश्वविद्यालय
श्रीनगर गढ़वाल



