लोक नाट्य ‘चक्रव्यूह’ को विरासत महोत्सव, देहरादून मा मंचन
गढ़वाल विश्वविद्यालय का 'लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन विभाग' न् दे अपणि प्रस्तुति
देहरादून मा हर साल आयोजित होण वळा ‘विरासत महोत्सव 2025’ मा 11 अक्टूबर 2025को खुणि हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय का लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन विभाग द्वारा उत्तराखंड का प्रसिद्ध लोक नाट्य ‘चक्रव्यूह’ की शानदार प्रस्तुति दियेगे। ओ.एन.जी.सी देहरादून का ग्राउंड मा आयोजित यो 15 दिन को महोत्सव 4 अक्टूबर से 18 अक्टूबर तक होणू तय हुयूं छ, जैमा 11 अक्टूबर खुणि दिन मा 1:00 बजि बटि ‘चक्रव्यूह’ को मंचन ह्वे।

प्रस्तुति की शुरुआत मा लोक कला एवं संस्कृति विभाग का निदेशक गणेश खुगशाल ‘गणी’ जी बतै कि पैली बार ‘चक्रव्यूह’ को आयोजन रीच संस्था का सहयोग से ह्वे छौ। वूंन बोले कि खास करि यो नाटक चौक, खेत-खल्याण मा खिले जाण वळो नाटक छ जो दर्शकों तैं मनोरंजन से ज्यादा अपणि परंपराओं से जौड़णौ काम करद।
लगभग द्वी घंटा की यीं प्रस्तुति मा सिर्फ उत्तराखंड का हि लोग ना बल्कि हौरि देश-प्रदेश का लोगों तैं बि भाव-विभोर करिदे। ‘चक्रव्यूह’ महाभारत की कथा पर आधारित एक लोक नाट्य छ जै तै लोक न् अपणा ढंग से आत्मसात करे अर फिर वूं भावनाओं तैं एक प्रस्तुति का माध्यम से लोक का हि सामणि रखे।
‘चक्रव्यूह’ की यीं प्रस्तुति मा अभिनय, संवाद अर गीत-संगीत को सुंदर संयोजन दिखण मा औंद। पात्र अफु तैं ज्यूंदा-जगदा पांडव अर कौरव का रूप मा प्रस्तुत करदन। पात्रों को सजीव व सहज अभिनय का दगड़ जागर गायन का माध्यम से कथा अगनै बढ़दि अर क्रमबद्ध रूप मा अपणा अंत तक पौंछदि।
यीं प्रस्तुति को खास भाग गायन छ जैमा डॉ संजय पांडे, डॉ लता पांडे, डॉ शैलेंद्र मैठाणी आदि लोगों न् भौत शानदार गायकी से पूरा कार्यक्रम स्थल तैं गुंजायमान बणै दे। अभिनय मा भी कलाकारोंन् क्वी कमि नि छोड़ी अर दर्शकों का वास्ता यीं प्रस्तुति तैं यादगार बणै दे।
-आशीष सुंदरियाल



