रामलीला मैदानम लगि गढ़भोज को रस्वाड़ू
गढ़भोज दिवस पर रामलीला मैदान सिनगर मा फैलि पारंपरिक पहाड़ी व्यंजनों कि खुश्बु
गढ़भोज दिवस पर रामलीला मैदान सिनगर मा फैलि पारंपरिक पहाड़ी व्यंजनों कि खुश्बु।
रामलीला मैदानम लगि गढ़भोज को रस्वाड़ू, पारंपरिक व्यंजनों को लोगोंन लिनि खूब स्वाद; सेवा संकल्प मुहिम का मुताबिक निकाळेगि सेवा ज्योति पैदल यात्रा
सिनगर। गढ़भोज दिवस का मौका पर सेवा संकल्प मुहिम का मुताबिक रामलीला मैदानम गढ़भोज कार्यक्रम उर्यायेगे छौ। जैमा पापरंरिक खाणों गिरि गौं अर फरखेतु का सरोळा बांमणोन बणायि।
कार्यक्रममा भड्डू कि दाळ, मिठ्ठो भात, लाल चौंळों भात, तोरि दाळ, कंडाळि-काफलि, फांणु, चौंसि, झंगोरै खीर, कोदै रोटि, अल्वा गुटका हौर बि कैयि बानि का स्वादिस्ट ब्यंजन बणाया छया। बड़ि भयात मा लोखोंन भ्वांम (जमीन) बैठिक पाळौंम खाणां को स्वाद लिनि।
कार्यक्रममा कैबिनेट मंत्रि धन सिंह रावत जीन बि लोगों तैं खाणां बांटि। वूंन बोलि कि यना आयोजनों सि पाड़ि ब्यंजनों तैं बढ़ावा मिललो।
ये दौरान गढ़भोज मुहिम का सूत्रधार द्वारिका प्रसाद सेमवाळ, डॉ. अरविन्द दरमोड़ा अर समीर रतूड़ी मौजूद रैनि।
सेवा ज्योति पैदल यात्रा
सेवा संकल्प मुहिम मा सेवा ज्योति पैदल जातरा बि करि गेई। जैमा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तीरथ सिंह रावत, कैबिनेट मंत्रि धन सिंह रावत, बदरी-केदार मंदिर समिति का अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी समेत भाजपा नेता अर कार्यकर्ता सामिल ह्वेन।
पू० मुख्यमंत्रि तीरथ सिंह रावतन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विचार अर वूंका नेतृत्वा मा करे जांण वाळा कामों को बखान करि।
मंत्री डॉ. धन सिंह रावतन बोलि कि सेवा संकल्प अभियान को मकसद सेवा, सुशासन अर जनकल्याण की भावना कतैं जन-जन तक पौंछौंणो छ।
ये दौरान मेयर आरती भंडारी, भाजपा जिलाध्यक्ष कमल किशोर रावत, प्रमिला भंडारी, विनय घिल्डियाल, गणेश भट्ट जी समेत हौर बि नेता अर कार्यकर्ता मौजूद छया।
गढ़भोजै परंपरा अर पहाड़ी स्वाद
गढ़भोज जना आयोजन पहाड़ी क्षेत्र का पारंपरिक खान-पान तैं सामणि/अग्नै ल्हौण को एक जरिया छ। भड्डू की दाळ, फांणु, चौंसि, झंगोरै खीर, कोदै रोटि, लाल चौंळों भात जना पारंपरिक व्यंजन पहाड़ै खान-पान की समृद्ध परंपरा को हिस्सा छ।
यो व्यंजनों तैं नई पीढ़ी तक पौंछौण अर घर्अया नाज, दाळ अर पारंपरिक खान-पान तैं बढ़ावा द्योंण मा यना आयोजनों की भूमिका महत्वपूर्ण ह्वे सकदी।
स्थान: सिनगर
️ विषय: गढ़भोज दिवस, पहाड़ी खान-पान, लोकसंस्कृति
✍️राजेन्द्र सिंह पँवार