ओजोन दिवस: सिनगर गढ़वाळम 26 दिन खराब रै हवा, चिंता बढ़ौण वाळा छन वायु गुणवत्ता का आंकड़ा
हिमालै कि खुचलि मा बस्यां सिनगर गड्वाळै हवा कि शुद्दता पर हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विवि कि हिमालयी वातावरणीय एवं अंतरिक्ष भौतिकी शोध प्रयोगशाला मा एक साल को अध्ययन करेगै जैमा सिनगर सैर कि हवा जैरिलि पायेगै, ज्व बड़ि चिन्ता कि बात छ, जबकि हमारा पाड़ै हवा पाणीं साफ सुथरि अर शुद्द जाणें जांद पर ये अध्ययन सि पता चल्द कि यखै हवा पाणीं बि प्रदूषण कि पकड़म ऐगै, ज्व शनै शनै हमारी प्रकृति कि सुन्दरता अर गुणों तैं खत्म करणि छ।

अध्ययनम पीएम-2.5 की औसत सांद्रता 73.30 माइक्रोग्राम और पीएम-10 कि100.48 माइक्रोग्राम परति घन मीटर (हवा मा मौजूद भौत छोटा छोटा अर कठोर कण अर तरल बुंद) सबसे मुख्य प्रदूषक पाये गैन।
वखि 26 दिनोंम ओजोन को स्तर बि जरूरी मानक कि लगा (सीमा) से जादा पाये गैयि।
15 सितंबर 2025 बिटिन 15 सितंबर 2026 तक का 339 वैध दिनों का आंकड़ों का विश्लेषण का आधार पर मंगलवार तैं भौतिकी विभाग, चौरास परिसरम पांचवां ग्रीनहाउस गैस एवं वायु गुणवत्ता सूचना को बुलेटिन निकाळेगे।
सबसे जादा सोचण वाळि स्थिति 19 दिसंबर 2025 तैं सामणि आयि, जब ओजोन का आठ घंटौं को औसत 634.13 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर पौंछगे। येई दिन प्रति घंटा ओजोन की सांद्रता 880 माइक्रोग्राम से जादा दर्ज करेगे।
भौतिकी विभागा विभागाध्यक्ष प्रो. त्रिलोक चंद्र उपाध्याय न ये काम कि खूब परसंशा करि वून बोलि कि वैज्ञानिक अनुसंधान को लाभ समाज तक पौंछण चैंणो छ। वून डॉ. गौतम अर वूंकी शोध टीम अमनदीप विश्वकर्मा, अंकित कुमार अर सरस्वती रावत तैं जनहितकारी वैज्ञानिक पहल का वास्ता बधै दिनि।
हिमालयी वातावरणीय एवं अंतरिक्ष भौतिकी शोध प्रयोगशाला का अन्वेषक डॉ. आलोक सागर गौतमन बोलि कि अध्ययन मा मौसम का अनुसार प्रदूषण का स्तर मा बदलाव आयि। ठंड्यों मा तापमान प्रतिलोमन का कारण पीएम बढ़ि, जबकि गर्मियों मा जादा तापमान अर सौर विकिरण से ओजोन को स्तर बढ़ि। मानसूनम बरखा का वजै सि पीएम अनुमान से कम रै। कार्बन मोनोऑक्साइड बि 22 दिन निर्धारित सीमा से जादा दर्ज करेगै। वून बोले कि धरति का नजदीक जादा मात्रम मौजूद ओजोन हानिकारक वायु प्रदूषक छ।
