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भजन “जै नन्दा जगदम्बा”

ऋषि, मुनि जोगि-योगि तेरा गुण गांदा मां-तेरा गुण गांदन

सूण ल्यो

जै नन्दा जगदम्बा’ जै हो माँ, गौरा भवानी -2

जगत रचैता सैरी…

जगत रचैता मेरा पहाड़ों की ध्यांणी।।

 

ऋषि, मुनि जोगि-योगि तेरा गुण गांदा मां-तेरा गुण गांदन,

ब्रह्मा विष्णु शिवजी त्वेतैं हि ध्यांन्दा-माँ त्वेतैं हि ध्यांदन।

नरु कि नारैणी ज्वाला…

नरु कि नारैणी देबतौं की महाराणी।

जै नन्दा’ जगदम्बा’ जै हो माँ, गौरा भवानी…

 

रिद्धिसिद्दी सुखसमृद्धि बुद्धिज्ञान देंदी मां..बुद्धिज्ञान भी देंदी।

अष्टसिद्धि दात्री मां अभय दान भी देंदी.. प्राण दान भी देंदी।।

दयालु जसिली माँ तू…

दयालु जसिली तू सुफल वरदानी।

जै नन्दा’ जगदम्बा’ जै हो माँ, गौरा भवानी…

 

बांचदा बामणकथा पाठ सबतैं सुणौंदा..सैदा जगतैं बतौंदा।

बारनामी धुंयाल देंदा औजी वृत भनौंदा..औजी वृत  भनौंदा।।

ग्रन्थ,पुरांण चार..

ग्रन्थ पुरांण चार वेदों मा बखानी।।

जै नन्दा’ जगदम्बा’ जै हो माँ, गौरा भवानी…

 

शत्रु बिणाषिणी माता रोग नाशिणी भी पाप नाशिणी भी तू।

मनोकामना पुरयोन्दी, त्रास तारिणी भी तू-त्रास तारिणी भी तू।।

न सँघारक त्वे जनु……

न सँघारक त्वे जनु न त्वे जनु क्वी दानी।।

जै नन्दा’ जगदम्बा’ जै हो माँ, गौरा भवानी…

 

भक्तों की रख्वाळि करदि, पीड़ा विपदा हरदी मां..कष्ट विपदा बि हरदी

अभागों सुभाग देंदी, रीति कोख भरदी मां.. रीती कोख भी भरदी

शक्ति स्वरूप ज्वाला………..

शक्ति स्वरूप ममता की बाकबानी।।

जै नन्दा’ जगदम्बा’ जै हो माँ, गौरा भवानी…

 

©RajendraSinghPanwar”जीवन” (२०१९०८१५)

 

 

 

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